जब मरना भी मुहाल हो जाए

जब जीना एक मलाल बन जाए

और मरना भी मुहाल हो जाए ,

तो समझना सही समय आ गया है ।

समय आ गया है ,

खुद में हीं खोने का

सारे बँधनों से विमुक्त होने का।

मिली गालियों पर भी मुसकराने का।

वक्त बेवक्त झुम जाने का।

समय आ गया है ,

महफ़िलों में रंग जमाने का

हर बात पर टिठठकीयां लगाने का ।

बच्चों के संग दौड़ जाने का

बूढों के संग झपकीयां लगाने का ।

समय आ गया है ,

पिछे का पिछे छोड़ आगे बढ़ जाने का,

अपने दिलों से हर बोझ हटाने का

और जिंदगी को पूरा जी जाने का।

2 thoughts on “जब मरना भी मुहाल हो जाए

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