तुम भी बड़ी हो गयी ?

फ़िजाओं में गूँजा करती थी,

कल तक सुरीली सी हंसी तुम्हारी।

चुप-चुप सी रहती हो अब।

क्यों कुछ बोला नहीं करती ?

क्या तुम भी बड़ी हो गयी ?