अंतिम सत्य

संघर्ष हीं जब अंतिम सत्य हो

जीत हीं एकमात्र तथ्य हो

तब पराजय से घबराना कैसा?

लगती है ठोकर..

लगने दो।

लंबी हैं राहें..

होने दो।

जब क्षितिज तुम्हारी मंजिल है

तो सूरज से पहले

ढल जाना कैसा?

©Dr.Kavita

तुम रणभूमी के योधा हो..

तुम रणभूमी के योधा हो,
उठकर सीधा वार करो।
सूरज जब निकालेगा तब निकलेगा
तुम अंधेरे में हीं अभ्यास करो।
कण-कण तन मन
सब अपना तुम झोंका
ना नियति से कोई आस धरो।
लक्ष्य पाना हीं दुर्गम वय का हल है
लक्ष्य के आगे
हर कुछ का तुम परिहार करो।
तुम रणभूमी के योधा हो,
उठकर सीधा वार करो।

©Dr.Kavita

देखकर भी नहीं सकते हो तुम…

मेरी हंसी देख सकते हो तुम।
मेरी गुलाबी आंखों की छवि देख सकते हो तुम।
मेरे गालों पर पड़ते गड्ढे देख सकते हो तुम।
मेरे लंबे बालों की लट्टें देख सकते हो तुम।
मेरे तन का रंग देख सकते हो तुम।
मेरे शरीर की बनावट-ढंग देख सकते हो तुम।


सब देख सकते हो तुम,
फिर भी क्या मुझे देख सकते हो तुम?


रूह की चुभन, व्याकुल मन देख सकते हो तुम?
जो अथाह बेचैनी में गुजार दिए,
वो क्षण देख सकते हो तुम?
जिन्होंने उठा दिया निश्छलता से विश्वास
मेरे अंदर बसा उनका
जहरीला स्मरण देख सकते हो तुम?


अगर नहीं..
तो बस भ्रम देख सकते हो तुम।
झुठी हंसी, झुठा चलन देख सकते हो तुम।


देखकर भी मुझे नहीं देख सकते हो तुम।

©Dr.Kavita

पीले पत्ते..

मैं पीले पत्तों को गिरते देख रही थी।

गिरते पीले पतों ने भी मुझे देखा,

और मुझसे कहा-

क्या तुम जानती हो कि हम क्यों गिर रहें हैं?

मैं अपने अलहड़ से अंदाज में बोली-

बिल्कुल जानती हूँ।

तुम्हारे जाने का समय मुकर्रर था।

सावन में तुम आये, पतझड में तुमको झड़ जाना था।

अबतक पत्तें धरती को छू चुके थें।

उनमें से एक ने धीरे से कहा- वक्त है हमारा जो पेड़ से बिछड़ जाने का हो तो हम गिर जातें हैं।

पर तुम बताओ तुम जीते जी क्यों मर जाते हो?

My First Hindi Novel – Faisla/फैसला

My First Hindi Novel – Faisla/फैसला

This book titled ‘Faisla‘ is a hindi novel. The story of this novel shows the different emotions of human beings and the struggles they have in life regarding relationships and bonds. At every step in life, a person has to take some decision or the other. But any decision of a human being has an effect on him/her as well as the people associated with him/her. This novel is also the story of some of those decisions and the changes that take place in the lives of the characters because of those decisions. This story includes all the sorrows, joys, love, hate, hopes, duties, which are parts of any ordinary life. I wish for readers of this book that will love and enjoy reading this hindi novel story.

Title: Faisla
ISBN: 9781684876259
Format:Paperback
Book Size: 5.5*8.5
Page Count: 78

To Read my book through Amazon click here

To Read my book through Flipkart click here

To Read my book through Notionpress click here

तय कर लो, चाहते क्या हो?

तय कर लो,चाहते क्या हो?
जाने कि बात कर
रूक जाते हो हर बार।
रूकने का कह कर
खो जाते हो हर बार।
तय कर लो, चाहते क्या हो?

तय कर लो,
कि जिंदगी लंबी नहीं उतनी
जितना तुम समझ रहे हो।

तय कर लो,
कि कल प्यार के लम्हें बचेंगे नहीं उतना
जितना तुम आज दुशमनी में बहक रहे हो।

तो तय कर लो,
वक्त और भावनाएं बिन गँवाए
कि चाहते क्या हो?

©Dr.Kavita